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कितनी मोहब्बत है : (भाग -6) | Kitni Mohabbat Hai | Love Story | Pyar Ki Kahani | Real Love Story | Heart Touching Love Story

आज की कहानी का नाम है - " कितनी मोहब्बत है "। यह इस कहानी का (भाग -6) है। यह एक True Love Story है। अगर आप भी Love Story, Romantic Story या Hindi Love
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हेलो दोस्तों ! कहानी की इस नई Series में हम लेकर आए हैं आपके लिए एक और नई कहानी। आज की कहानी का नाम है - " कितनी मोहब्बत है "। यह इस कहानी का (भाग -6) है। यह एक True Love Story है। अगर आप भी Love Story, Romantic Story या Hindi Love Story पढ़ना पसंद करते हैं तो कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।

कितनी मोहब्बत है : (भाग -6) | Kitni Mohabbat Hai | Love Story | Pyar Ki Kahani | Real Love Story | Heart Touching Love Story

Kitni Mohabbat Hai | Love Story | Pyar Ki Kahani | Real Love Story | Heart Touching Love Story


कितनी मोहब्बत है : (भाग -6)


अब तक आपने पढ़ा...

निधि मीरा और उसकी फैमिली के साथ डिनर कर रही होती है और किसी का इंतजार भी। दरअसल वो अक्षत को सामने से देखना चाहती थी। 

लेकिन अक्षत अपने दोस्तों के साथ नाइट पार्टी करने गया होता है। डिनर के बाद मीरा और निधि अपने कमरे में जातीं हैं। 

सामने गार्डन में टहल रहे दादा दादी को देखकर निधि मीरा से प्यार के बारे में पूछती है। मीरा उसे उसके सवाल का बड़ा प्यारा जबाब देती है। 

कुछ समय बाद सब लोग सो जाते हैं। रात में मीरा की आंख खुल जाती है और वो नीचे हाल में आती है।

अब आगे...

मीरा जब ऊपर आई तो वो परछाई उसे हॉल की बालकनी से ऊपर आते दिखी। 

मीरा," अगर हमने लाइट चलाई तो वो भाग जायेगा। अंधेरे में ही जाकर पकड़ते हैं उसे। "

मीरा ने मन ही मन खुद से किसी जासूस की तरह कहा और धीरे धीरे कदम बढ़ाते हुए हाल की ओर गई। हालाँकि वो भूल चुकी थी कि ये हाल अक्षत का था और घर वालों का वहाँ जाना बिल्कुल मना था। 


नीचे वाल पर लगे बल्ब की हल्की रोशनी वहाँ तक आ रही थी। मीरा बड़ी सफाई से धीरे धीरे कदम बढ़ाते हुए बालकनी की ओर आई। 

जैसे ही वो परछाई बालकनी की पर अंदर हाल में आई, मीरा ने उसका सीधा हाथ मजबूती से अपने हाथ में पकड़ा और घुमाकर उसकी पीठ से लगाकर कहा।

मीरा," क्या चुराने आये हो यहाँ ? खुद को बहुत शातिर समझते हो ? लेकिन मेरी नज़रों से बचना इतना आसान नहीं है चोर। "

अक्षत," वाट द हेल। "

मीरा," क्या बात है..? इंदौर के चोर इतने पढ़े लिखे... भाई वाह ! अंग्रेजी में बात कर रहे हैं। "

मीरा ने ताना मारते हुए कहा। लड़के ने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की लेकिन मीरा ने इतना कसकर पकड़ रखा था, ऊपर से मोड़कर पीठ से लगाया हुआ था। बेचारा चाहता तो भी कुछ नहीं कर पाता। "

अक्षत," तुम हो कौन और ये क्या बकवास कर रहे हो ? "

लड़के ने गुस्से से कहा। 

मीरा," हमारी छोड़ो, तुम बताओ ? तुम यहाँ क्या चुराने आये हो ? "

मीरा ने भी अकड़कर कहा।

अक्षत," मैं कोई चोर नहीं हूँ और ये मेरा घर है। मैं चाहे जैसे आऊँ, तुम होती कौन हो ? "

लड़के ने झटके से अपना हाथ छुड़ाया और मीरा की ओर पलटकर कहा। 

लैम्प की मध्यम रौशनी में वो कुछ कुछ दिखाई दे रहा था। लेकिन मीरा ने ध्यान नहीं दिया और दो कदम उसकी ओर बढ़ाकर कहा।

मीरा," वाह ! क्या मस्त एक्टिंग करते हो ? तुम्हारा घर... एक देंगे न रख के, सारा सच उगल दोगे। रुको, अभी हम सबको आवाज लगाते हैं। "

कहते हुए मीरा ने जैसे ही चिल्लाने की कोशिश की, लड़के ने आगे बढ़कर उसके मुँह पर अपना हाथ रखा और पीछे धकेलते हुए दीवार से लगा दिया। मीरा ने सामने देखा तो बस देखती ही रह गयी। 

सांवला रंग, कटीली आँखें, सुर्ख हो, बाये, कान में काले रंग की गोल छोटी बाली, सीने पर गर्दन से कुछ नीचे एक छोटा सा टैटू बना हुआ था। 

मीरा ने जैसे ही उसकी आँखों में देखा तो उसका दिल तेजी से धड़क उठा। मुँह बंद था लेकिन दिल जोर जोर से आवाज कर रहा था। 


उस लड़के की आँखें इतनी गहरी और कातिल थी कि मेरा तो क्या, कोई भी लड़की देखते ही होश खो बैठती। ये आँखें मीरा को जानी पहचानी लग रही थी। 

लेकिन बोलती कैसे, मुंह तो बंद था ? उसने एक तरकीब लगाई और मन ही मन कहा।

मीरा (मन में)," दिखता तो अच्छे घर का है, फिर यहाँ क्या चुराने आया होगा ? खूबसूरत भी है और आँखे तो... यह क्या सोच रही है तू मीरा ? 

याद है न... हर खूबसूरत चीज खतरनाक होती है ? और खूबसूरत है तो क्या हुआ, है तो ये चोर ही न ? "

सोचते हुए उसने अपना पैर जोर से लड़के के पाँव पर दे मारा। लड़के ने मीरा के मुँह से हाथ हटाया और अपना पाँव देखने लगा। तभी मीरा जोर से चिल्लाई। 

अक्षत," अबे चुप, पापा ने सुन लिया तो बैंड बजा देंगे।

लड़के ने एक बार फिर मीरा का मुंह बंद करते हुए कहा। तब तक निधि उठकर आ चुकी थी। 

हालांकि मीरा की आवाज नीचे नहीं गई थी। निधि ने जब देखा तो उनके पास आई और लड़के को मीरा से दूर करके कहा।

निधि," ये क्या कर रहे हो भाई ? ये मेरी दोस्त है, मीरा। "

मीरा ने निधि के मुंह से लड़के के लिए ' भाई ' शब्द सुना तो अवाक रह गयी। अपने शक को दूर करने के लिए उसने निधि से हिचकिचाते हुए कहा।

मीरा," ये कौन है ? "

निधि," यही तो हैं अक्षत भैया। "

मीरा," क्या..? "

मीरा ने सुना तो उसकी जान हलक में आ गयी। कुछ देर पहले कही उसकी बातें उसके कानों में बजने लगीं। 

वह कभी अक्षत को देखती तो कभी उसके पांव को, जिस पर अभी अभी उसने मारा था। 

मीरा या अक्षत कुछ कहते इससे पहले ही निधि ने अक्षत से कहा।


निधि," क्या है ये सब..? आप मेरे दोस्त के साथ ऐसे बिहेव कैसे कर सकते हो ? "

अक्षत," दोस्त है तो इसे बोल दोस्त की तरह रहे। जेम्स बोर्ड न बने। "

अक्षत ने मीरा को लगभग घूरते हुए कहा। निधि मीरा के आगे आकर खड़ी हो गयी और अक्षत से कहा।

निधि," क्या किया इसने, बताओ ? "

अक्षत," इसी से पूछ लो। मेरे ही घर में आकर मुझे ही चोर समझ रही है...स्टूपिड। "

निधि मीरा की ओर पलटी और धीरे से कहा। 

निधि," क्या सच में..? "

मीरा ने मासूमियत से कहा।

मीरा," हमें लगा घर में चोर घुस आया है तो हमने... मतलब इस तरह दीवार चढ़कर बालकनी से अन्दर कौन आता है ? "

अक्षत ने निधि को पकड़कर साइड किया और मीरा को उंगली दिखाते हुए कहा।

अक्षत," ये घर मेरा है, मैं दरवाजे से आऊं चाहे बालकनी से दीवार चढ़कर आऊं या खिड़की कूदकर, तुम्हे उससे क्या ? "

अक्षत," मैं बता रहा हूँ निधि, अगर तुम नहीं आती न तो ये मेरा खून ही कर देती। "

मीरा," नहीं नहीं, ऐसा क्यूँ करते हम ? "

मीरा ने कहने की कोशिश की तभी अक्षत ने कहा।

मीरा," तुम निकलो यहाँ से। आई थिंक, तुम दोनों ही निकालो यहाँ से। "

निधि मीरा का हाथ पकड़कर उसे अपने साथ ले जाने लगी। जाते जाते मीरा ने पलटकर अक्षत को देखा तो वह वहाँ सोफे पर बैठा अपना पाँव सहला रहा था। कमरे में आकर निधि ने दरवाजा बंद करते हुए कहा। 

निधि," अच्छा हुआ मम्मा पापा ने नहीं देखा वरना अक्षत भैया की पिटाई पक्का हो जाती। "


मीरा," आइम सो सौरी निधि, वो हमें नहीं पता था कि वो तुम्हारा भाई है। हमने उनसे न जाने क्या क्या बोल दिया ? "

मीरा ने उदास होकर कहा। 

निधि," अरे ! इट्स ओके, इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है। चिल रहो, सुबह तक सब नार्मल हो जाएगा। "

मीरा," पर वो इस तरह दीवार चढ़कर... हमारा मतलब दरवाजे से भी तो आ सकते थे न ? "

निधि," साहब ज्यादा पार्टी करके आये होंगे तो पापा से सामना करने में तो शर्म आ रही होगी न ? इसीलिए ऐसे आए हैं। 

वैसे भी बहुत बार वो ऐसे ही आते हैं। इसलिए तो उधर किसी को आने नहीं देते। "

मीरा ," सोचा नहीं था, आपसे ऐसे मुलाकात होगी। आप सच में कॉम्प्लिकेटेड ही हो। "

मीरा बड़बड़ाई तो निधि ने कहा।

निधि," क्या हुआ..? चलो सो जाओ और ज्यादा मत सोचो। "

निधि कम्बल में घुस गयी। 

मीरा," हम अभी आते हैं। "

कहकर मीरा ने सामने टेबल पर रखी ट्यूब उठाई और बाहर चली गयी। निधि सो गयी। मीरा कमरे से बाहर आई। 

उसने देखा हॉल में बैठा अक्षत अपने पाँव को देख रहा था। मीरा उसके पास आई और ट्यूब उसकी ओर बढ़ा कर कहा।

मीरा," यह लगा लीजिये, इससे दर्द कम हो जाएगा। "

अक्षत ने मीरा की ओर देखा तो मीरा ने दुखी होकर कहा।

मीरा," हमें पता नहीं था, आप कौन हैं ? इसलिए वो सब कह दिया। हो सके तो माफ़ कर दीजियेगा। "

अक्षत ने कुछ नहीं कहा, बस खामोशी से देखता रहा। अक्षत को चुप देखकर मीरा की बेचैनी और ज्यादा बढ़ गयी तो उसने वहाँ से जाना ही ठीक समझा। 

मीरा वहाँ से चली गयी। अक्षत ने क्रीम पांव पर लगायी और वहीं सोफे पर लेट गया। नींद कब आई, उसे कुछ पता नहीं लगा। 

सुबह 7 बज रहे थे। मीरा नहाकर तैयार हो चुकी थी। जैसे ही वो कमरे से बाहर निकली, उसकी नजर हॉल में सोए हुए अक्षत पर गई। 


न चाहते हुए भी मीरा के कदम उस ओर बढ़ गए। मीरा आकर उसके पास खड़ी हो गई। 

सोते हुए अक्षत बिल्कुल मासूम बच्चे की तरह लग रहा था। मीरा ने उसे देखते हुए मन ही मन खुद से कहा।

मीरा (मन में)," सोते हुए कितने अच्छे लगते हैं आप। न कोई गुस्सा, न कोई खींच। "

सूरज की किरणें सीधे अक्षत के चेहरे पर आ रही थी और उसे परेशान कर रही थी। मीरा बालकनी के पास आई और उसने पर्दा आगे बढ़ा दिया, जिसने सूरज की किरणों को अंदर आने से रोक लिया। 

मीरा वहाँ से नीचे चली आई। पूजा घर के सामने आकर उसने हाथ जोड़े और कहने लगी।

मीरा," हे शिव भगवान ! अब हमसे कोई गलती न हो। यहाँ सब लोग बहुत अच्छे हैं। हम अनजाने में भी कभी उनका दिल न। दुखाएं। "

प्रार्थना करने के बाद मीरा जैसे ही जाने के लिए पलटी, अर्जुन से टकरा गई। अर्जुन के हाथ में हल्दी की कटोरी थी, जो दादी ने ही मंगवाई थी पूजा घर में। 

लेकिन जैसे ही मीरा अर्जुन से टकराई, सारी की सारी हल्दी अर्जुन के शर्ट पर आ गिरी। मीरा ने देखा तो कहा।

मीरा," माफ़ कर दीजिये, वो हमने ध्यान नहीं दिया। हम साफ़ कर देते हैं। "

कहते हुए मीरा ने अपने दुपट्टे से अर्जुन की शर्ट को साफ़ करना शुरू किया और लगभग बड़बड़ाते ही जा रही थी। मीरा जितनी परेशान थी, अर्जुन उतने ही प्यार से उसे देख रहा था। 

अर्जुन ने देखा, मीरा जिस दुपट्टे से हल्दी साफ़ कर रही है, वो भी पीला हो चुका है। तो उसने कहा।

अर्जुन," इसे साफ़ करने के चक्कर में आप अपने दुपट्टा खराब कर लिया। "

मीरा ने देखा तो अपना सर पीट लिया और मन ही मन कहा।

मीरा," ये क्या किया... अपना फेवरेट दुपट्टा खराब कर लिया ? "

अभी वो खुद को कोस ही रही थी कि तभी दादी वहाँ आई और अर्जुन की हालत देखकर कहा।

दादी," अरे अर्जुन ! ये क्या, सारी हल्दी अपने ऊपर गिरा ली ? "

मीरा," जी दादी, वो हमारी वजह से गिर गई। आइम सौरी। "


मीरा ने उदास होकर कहा।

दादी," अरे बेटा ! उदास मत हो। ये तो अच्छा शगुन है। हल्दी का गिरना मतलब घर में कुछ अच्छा काम होने वाला है। क्या पता अर्जुन की शादी ही हो जाए ? "

दादी ने हँसते हुए कहा। 

अर्जुन," क्या दादी आप भी ? "

अर्जुन ने शर्माते हुए कहा।

राधा," सही कह रही है दादी। शादी की उम्र तो हो ही चुकी है तुम्हारी। "

दूर से राधा ने आते हुए कहा। 

अर्जुन," मैं शर्ट चेंज करके आता हूँ। "

कहकर अर्जुन वहाँ से चला गया। "

राधा," देखा मीरा, शादी के नाम से कैसे भाग गए लाड साहब ? "

राधा ने मुस्कराते हुए कहा। 

मीरा," जब सही वक्त आएगा तो वो खुद हाँ कह देंगे, आंटी और देखना उन्हें बहुत अच्छी लड़की मिलेगी। "

कहते हुए मीरा ने जैसे ही ऊपर वाले फ्लोर की ओर देखा, सामने अक्षत खड़ा अंगड़ाई ले रहा था, जिसे देखकर मीरा ने मन ही मन कहा। 

मीरा," बाकी इन्हें कोई लड़की शादी के लिए हां कहेगी कि नहीं, इसका कुछ पता नहीं। सच लिखा है इन्होंने अपने नाम के आगे... कॉम्प्लिकेटेड। "

यहाँ बस इतना ही, इस अनोखी कहानी को आगे जारी रखने के लिए इसका अगला भाग पढ़ें।

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हेलो दोस्तों ! मैं हूं आपका अपना दोस्त, प्रदीप। यहां मैं कुछ अनोखी कहानियों के साथ आपका मनोरंजन करूंगा। अगर आपको हमारा लेखन कार्य पसंद आए तो हमें Support करें और अपना प्यार बनाए रखें।

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