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कितनी मोहब्बत है : (भाग -7) | Kitni Mohabbat Hai | Love Story | Pyar Ki Kahani | Real Love Story | Heart Touching Love Story

आज की कहानी का नाम है - " कितनी मोहब्बत है "। यह इस कहानी का (भाग -7) है। यह एक True Love Story है। अगर आप भी Love Story, Romantic Story या Hindi Love
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हेलो दोस्तों ! कहानी की इस नई Series में हम लेकर आए हैं आपके लिए एक और नई कहानी। आज की कहानी का नाम है - " कितनी मोहब्बत है "। यह इस कहानी का (भाग -7) है। यह एक True Love Story है। अगर आप भी Love Story, Romantic Story या Hindi Love Story पढ़ना पसंद करते हैं तो कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।

कितनी मोहब्बत है : (भाग -7) | Kitni Mohabbat Hai | Love Story | Pyar Ki Kahani | Real Love Story | Heart Touching Love Story

Kitni Mohabbat Hai | Love Story | Pyar Ki Kahani | Real Love Story | Heart Touching Love Story


कितनी मोहब्बत है : (भाग -7)


अब तक आपने पढ़ा...

मीरा आधी रात को नीचे हाल में आती है। तभी उसे एक परछाईं आती दिखाई देती है। वह उसे चोर समझकर समझकर उसे पीछे से कस के पकड़ लेती है और उसके पैर पर अपने सैंडल की एड़ी रगड़ देती है जिससे अक्षत का पैर घायल हो जाता है। 

अक्षत शोर मचा देता है। शोर सुनकर निधि नीचे आती है। उसके आने के बाद मीरा को पता चलता है कि जिस लड़के को मीरा चोर समझ रही है, वह कोई और नहीं बल्कि निधि का भाई अक्षत है।


अब आगे...

ऊपर खड़ा अक्षत अंगड़ाई ले रहा था। जैसे ही उसकी नजर मीरा पर पड़ी, उसने पाया कि मीरा उसे ही देख रही थी। दोनों की नजरें मिलीं तो मीरा ने मन ही मन कहा। 

मीरा ," यहाँ रहना है तो इनसे दूरी बनाकर रखनी पड़ेगी। "

वहीं ऊपर खड़ा अक्षत मीरा को देखते हुए सोच रहा था।

अक्षत," तुम इस घर में ज्यादा दिन की मेहमान नहीं हो, मिस जेम्स। "

मीरा मुस्कराई तो अक्षत उसे इग्नोर करके वहाँ से चला गया। उसके बाद मीरा अपना दुपट्टा बदलने सीडियों की तरफ बढ़ गयी। 
दूसरा दुपट्टा लेकर मीरा नीचे आई। उसने देखा राधा अकेली ही किचन में थी और मीरा भी उनकी मदद करने किचन में चली आई। 


मीरा की रुचि देखते हुए राधा ने भी उसे काम करने दिया और मीरा से सबके लिए चाय बनाने को कहा। सच ही कहा था मीरा ने कि उसे सिर्फ चाय बनानी आती है। 

उसकी बनाई चाय की खुशबू से सारा किचिन महक उठा था। राधा को कुछ बनाते देखकर मीरा उनके पास आई और कहा। 

मीरा," आप क्या बना रहे हैं ? "

राधा," उत्तपम... खाया है कभी ? "

राधा ने बनाते हुए कहा। 

मीरा," नहीं खाया, पर इसकी खुशबू अच्छी है। इसे कैसे बनाया आपने ? "

मीरा ने सुगन्ध लेते हुए कहा। 

राधा," इसे सूजी और चावल के घोल से बनाते हैं। पहले गैस पर फ्राईदान रखकर उस पर थोड़ा सा तेल डालकर फैलाओ, फिर सूजी का घोल ऐसे धीरे धीरे फैलाना है। 

उसके बाद इसके ऊपर बारी बारी कटी सब्जियां जैसे कि प्याज, शिमला, मिर्च, टमाटर, पत्ता, गोभी डालकर इस पर फैलाना है। 

इसके बाद नमक और मसाला स्वाद अनुसार डालकर इसे दूसरी ओर पलटना है। जब दोनो तरफ से अच्छा सिक जाए तो फ्राईदान से निकाल लो। "

मीरा," ये तो बहुत ईजी है। आंटी हमें भी सीखना है। "

अक्षत," पहले लोगों को तो पहचानना सीख लो। "

एक जानी पहचानी आवाज़ मीरा के कानों में पड़ी। उसने जैसे ही गर्दन घुमाई, किचन के दरवाजे पर अक्षत खड़ा था। अक्षत की आवाज़ सुनकर राधा पलटी और कहा‌।

राधा," उठ गया तू... और घर कब आया ? तुझे पता है न तेरे पापा को तेरा घर देर से आना बिल्कुल पसंद नहीं है ? पर तू सुनता ही नहीं। "

अक्षत," सौरी माँ, अब से नहीं होगा ऐसा। "

अक्षत ने अंदर आकर राधा को साइड से गले लगते हुए कहा। 

राधा," यह मीरा है, निधि की सहेली। "

अक्षत," हाँ, कल रात मिल चूका हूँ मैं इनसे। काफी स्ट्रोंग हैं। "

अक्षत ने मीरा को घूरते हुए कहा। 

राधा," अच्छा है। चलो सबके साथ बैठकर नाश्ता कर लो,
 और मीरा, तुम चाय लेकर बाहर आ जाना... ठीक है। "

कहते हुए राधा ने नाश्ते की प्लेट उठाई और बाहर निकल आई। किचन में बस मीरा और अक्षत थे।

मीरा चाय छानने लगी। अक्षत कुछ ही दूरी पर खड़ा अपने कप में दूध डालकर उसमें काफी मिक्स कर रहा था। 

मीरा ने एक बार उसकी ओर देखा और फिर वापस अपने काम में लग गयी। चाय छानकर वो कप ढूंढने लगी। 

उसने इधर उधर देखा। कप अक्षत की साइड में रौ में लगे थे। मीरा उसकी ओर आई तो अक्षत ने आँखों के भोंए मटकाकर इशारा किया तो मीरा ने मरी हुई सी आवाज़ में कहा।

मीरा," वो... कप चाहिए। "

कहकर अक्षत थोड़ा सा साइड हो गया। मीरा ने कप उठाया और जैसे ही साइड हुई, अक्षत को देखकर उसके हाथ से कप छूट गए। 

लेकिन कप नीचे गिरते इससे पहले ही अक्षत ने उन्हें अपने दोनो हाथों में कैच कर लिया। मीरा की जान में जान आई तो उसने कहा।

मीरा," थैंक यू। "


अक्षत ने अगले ही पल कप निचे गिरा दिए। मीरा डर गई। उसे समझ नहीं आया कि वह क्या करे ? कप गिरने की आवाज सुनकर राधा अंदर आई और कहा। 

राधा," क्या हुआ ? कुछ गिरने की आवाज आई थी ? "

अक्षत," माँ, वो इनके हाथों से कप छूट गए और टूट भी गए। "

अक्षत ने मासूम बनते हुए कहा। जबकि सच तो कुछ और था। 
मीरा क्या कहती..? अगर कहती भी तो कौन भरोसा करता ? उसकी रोनी सूरत देखकर राधा ने बड़े प्यार से कहा। 

राधा," कोई बात नहीं, कप और आ जायेंगे। तुम नाश्ते के लिए चलो, चाय मैं ले आती हूँ। "

अक्षत," सुना तुमने..? माँ ने कहा है कि कप और आ जायेंगे। "

मीरा," हम्म। "

मीरा ने राधा से कहा और जैसे ही जाने लगी, अक्षत ने अपना कप उठाया और उसके पास से गुजरते हुए कहा।

अक्षत," आई जस्ट हेट थैंक यू। "

अक्षत वहाँ से निकल गया और मीरा मन ही मन उसे कोसते हुए बाहर चली आई। बाहर डाइनिंग टेबल पर सभी मौजूद थे। मीरा भी आकर चुपचाप निधि के बगल में बैठ गयी। 

दादी," नींद ठीक से आ गई थी न मीरा ? "

मीरा," जी। "

मीरा ने नज़रें झुकाए हुए कहा। क्यूँकि मीरा के बिल्कुल सामने दादी के बगल में अक्षत बैठा था। वो फिर से किसी मुसीबत में बिल्कुल नहीं फंसना चाहती थी। तभी दादू ने कहा।

दादू," और छोटे जनाब, आज तुम नाश्ते की टेबल पर क्या कर रहे हो ? आज से पहले तो कभी नहीं देखा तुम्हे यहाँ। "

अक्षत दादाजी का ताना समझ चुका था, क्यूँकी आज से पहले न तो वो कभी इतना जल्दी उठा था और न ही नाश्ते के लिए नीचे आया था। रघु अक्सर उसका नाश्ता ऊपर ही लेकर जाता था। 

अक्षत," दादू, आज जल्दी उठा तो सोचा सबके साथ नाश्ता कर लूं। "

दादू," अरे बेटा ! आज क्यूँ... रोज आया करो ? परिवार के साथ बैठकर खाने का अपना ही मजा है। " 

राधा सबके लिए चाय ले आई। उसने अक्षत को छोड़कर सबको चाय दी और सबकी प्लेट में नाश्ता परोसकर खुद भी चाय लेकर बैठ गयी। दादू ने जैसे ही एक घूंट भरा... कहा। 

दादू," वाह ! आज की चाय बड़ी स्वादिष्ट है। बहू, सच में पीते ही मन खुश हो गया। "

राधा," पापा, आज चाय मैंने नहीं बल्कि मीरा ने बनाई है। ये इसके हाथों का जादू है। "

राधा ने मुस्कुराते हुए कहा। जैसे ही सबने सुना चाय आज मीरा ने बनाई है तो सब चाय पीते हुए मीरा की तारीफ करने लगे। अर्जुन ने तो फटाफट अपनी चाय खत्म भी कर दी और कहा। 

अर्जुन," माँ, मुझे एक कप चाय और चाहिए। "

राधा ने सुना तो हैरानी से अर्जुन की ओर देखा और फिर उसे एक कप चाय और दे दी। अक्षत बैठा बैठा अर्जुन को घूर रहा था। तभी दादी ने कहा।


दादी," अक्षत, तुम भी चाय पीकर देखो। बहुत अच्छी बनी है। "

अक्षत," मैंने अभी नशा करना शुरू नहीं किया है। "

अक्षत ने कॉफी पीते हुए कहा। 

अर्जुन," चाय में नशा होता है, किसने कहा ? और मीरा ने तो वैसे भी अच्छी चाय बनाई है। "

अक्षत," हाँ तो आप लोग पियो, मुझे नहीं पसंद। "

कहते हुए अक्षत उत्तपम खाने लगा। सभी चुपचाप नाश्ता करने लगे। मीरा और निधि नाश्ता करने के बाद उठकर कमरे से अपनी बुक्स और बैग्स ले आईं। अर्जुन ने देखा तो कहा।

अर्जुन," निधि, मैं उधर ही जा रहा हूँ। चलो तुम दोनों को भी छोड़ देता हूँ। "

निधि," आपकी तबियत ठीक है न भैया ? "

निधि ने अर्जुन के माथे को हाथ लगाकर कहा। 

अर्जुन ," हाँ, क्यूँ..? "

निधि ," आज से पहले तो आपने कभी नहीं कहा... निधि, कॉलेज छोड़ देता हूँ। फिर आज अचानक..? "

 निधि की बात सुनकर अर्जुन झेप गया। अब बेचारा कैसे कहता कि वो कॉलेज मीरा की वजह से जाना चाहता था ? उसने निधि से कहा। 

अर्जुन," मुझे सच में उस साइड काम है। तुम्हे जाना है तो जाओ। "

कहते हुए अर्जुन जाने लगा तो निधि ने रोकते हुए कहा।

निधि," अरे रे भैया ! मैं तो मजाक कर रही थी। अब चलो जल्दी देर हो जाएगी। "

अर्जुन," बस दो मिनट में अपना बैग और फ़ोन लेकर आता हूँ। "

कहते हुए अर्जुन चला गया। निधि बाहर जा चुकी थी। मीरा वहीं खड़ी अर्जुन के आने का इंतज़ार कर रही थी। अर्जुन वापस आया तो उसके हाथ में बैग, फ़ोन और ढेर सारी फाइल्स भी थीं।

मीरा ," यह हमें दे दीजिये। "

मीरा ने सहजता से कहा तो अर्जुन ने फ़ोन और बैग छोड़कर फाइल्स मीरा को थमा दीं। दोनों साथ साथ चलने लगे तो अर्जुन ने कहा।

अर्जुन," चाय अच्छी बनी थी। "

मीरा," थैंक यू। "

अब इससे आगे अर्जुन के पास बोलने को कुछ नहीं था। निधि बाहर आकर पहले ही गाड़ी में पिछली सीट पर बैठ चुकी थी। अर्जुन मुस्कुराया और आगे बढ़कर मीरा के लिए दरवाजा खोला। लेकिन मीरा बैठती, उससे पहले ही अक्षत आकर बैठ गया। 

अर्जुन," तुम कहां ? "


अर्जुन ने अपने सपनों के पुल को टूटते देखकर कहा।

अक्षत," वो आगे मुझे यूनिवर्सिटी छोड़ देना। "

अर्जुन," तू बाइक से चला जा। "

 अक्षत," नहीं, वो मेरे दोस्त इंतज़ार कर रहे हैं। वहाँ से मुझे बाहर जाना है। उनके पास गाड़ी है। बाइक कहाँ खड़ी करूंगा ? "

अर्जुन ने मीरा के लिए पीछे का दरवाजा खोला और बैठने का इशारा किया। खुद आकर ड्राइवर सीट पर बैठा और सीट बेल्ट लगाते हुए कहा।

अर्जुन," पापा को बताया अपने बाहर जाने के बारे में ? "

अक्षत," चिल ब्रो, पापा के आने से पहले घर आ जाऊंगा मैं। अब चलो मुझे लेट होना बिल्कुल पसंद नहीं है। "

अर्जुन ने गाड़ी स्टार्ट करके आगे बढ़ा दी। 

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हेलो दोस्तों ! मैं हूं आपका अपना दोस्त, प्रदीप। यहां मैं कुछ अनोखी कहानियों के साथ आपका मनोरंजन करूंगा। अगर आपको हमारा लेखन कार्य पसंद आए तो हमें Support करें और अपना प्यार बनाए रखें।

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