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कितनी मोहब्बत है : (भाग -8) | Kitni Mohabbat Hai | Love Story | Pyar Ki Kahani | Real Love Story | Heart Touching Love Story

आज की कहानी का नाम है - " कितनी मोहब्बत है "। यह इस कहानी का (भाग -8) है। यह एक True Love Story है। अगर आप भी Love Story, Romantic Story या Hindi Love
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हेलो दोस्तों ! कहानी की इस नई Series में हम लेकर आए हैं आपके लिए एक और नई कहानी। आज की कहानी का नाम है - " कितनी मोहब्बत है "। यह इस कहानी का (भाग -8) है। यह एक True Love Story है। अगर आप भी Love Story, Romantic Story या Hindi Love Story पढ़ना पसंद करते हैं तो कहानी को पूरा जरूर पढ़ें।

कितनी मोहब्बत है : (भाग -8) | Kitni Mohabbat Hai | Love Story | Pyar Ki Kahani | Real Love Story | Heart Touching Love Story

Kitni Mohabbat Hai | Love Story | Pyar Ki Kahani | Real Love Story | Heart Touching Love Story


कितनी मोहब्बत है : (भाग -8)


अब तक आपने पढ़ा...

मीरा पहली बार अक्षत से मिली। उनकी पहली मुलाकात ऐसी थी कि कोई सोच नहीं सकता। पहली मुलाकात में ही अक्षत मीरा से दुश्मनी सा व्यवहार करने लगा था। 

मीरा जब नीचे आई तो राधा को अकेले किचन में देख उसका हाथ बंटाने लगी। उसने राधा से उत्तपम बनाने की रेसिपी भी सीखी। 

इन सब के बीच जब भी अक्षत को मीरा को परेशान करने का मौका मिलता, तो वह खाली नहीं जाने देता।

अब आगे...

मीरा को आगे न बैठा पाने का उसे मलाल था। इसीलिए उसने गाड़ी के अंदर का शीशा सेट कर लिया जिससे मीरा उसे नज़र आ सके। 

मीरा का ध्यान खिड़की के बाहर था। वो बड़े गौर से सब देख रही थी। 

निधि अपने फ़ोन में बिजी थी और अक्षत... वो सर सीट से लगाकर कभी अर्जुन को देखता तो कभी सामने। 

मीरा ने खिड़की का शीशा हल्का सा खोल दिया। हालांकि ठंड थी पर मीरा को अच्छा लग रहा था। 


बाल उड़कर चेहरे पर आ रहे थे। मीरा ने सर ग्लास से लगा लिया और बड़े प्यार से बाहरी दुनिया को देख रही थी। 

अक्षत ने जैसे ही साइड मिरर में देखा तो कुछ पल के लिए नजरें वहीं जम गयी। वो बालों की लटों का बार बार मीरा के चेहरे को चूमना कितना खूबसूरत बना रहा था। 

अक्षत काफ़ी देर तक देखता रहा और फिर गर्दन घुमाकर अर्जुन की ओर देखने लगा। 

कुछ देर बाद गाड़ी कॉलेज के गेट के सामने आकर रुकी। निधि और मीरा अपनी अपनी बुक्स लेकर नीचे उतर आईं। 

अर्जुन गाडी लेकर वापस निकल गया और अक्षत को उसकी यूनिवर्सिटी के सामने छोड़कर खुद ऑफिस चला गया। 

मीरा और निधि जैसे ही कॉलेज आईं, विनीत उनके पास आया‌। निधि मीरा और विनीत को अकेले छोड़कर चली गयी। मीरा को खामोश देखकर विनीत ने कहा।

विनीत," निधि ने तुम्हारी माँ के बारे में बताया... जानकर दुख हुआ। "

मीरा ," हम्म। "

विनीत ," तुम निधि के साथ रहती हो ? "

मीरा," हां। "

 विनीत," मीरा, कोई भी हेल्प चाहिए तो प्लीज मुझसे कहना, मुझे अच्छा लगेगा। "

हेल्प के नाम से मीरा को विनीत की भेजी नोटबुक याद आई। उसने नोट बुक निकाली और विनीत की ओर बढ़ाकर कहा।

मीरा ," हमें इसकी जरूरत नहीं है विनीत। प्लीज हमारे लिए ये सब मत करो, हमें अच्छा नहीं लगता। "

विनीत," मीरा, ये मैंने सिर्फ इसलिए भेजी थी क्यूंकि एक महीने तुम कॉलेज नहीं आ पायी थी। सोचा तुम्हे कोर्स कम्प्लीट करने में आसानी होगी। एक महीने बाद एग्जाम्स हैं। "

 मीरा," हम कर लेंगे, पर रखो। "

कहते हुए मीरा वहाँ से निकल गयी और विनीत वहाँ रुक गया। तभी विनीत के दोस्त ने आकर कहा।

दोस्त," भाई, पिछले 2 सालों से तू ट्राई कर रहा है, पर बंदी तुझे घास नहीं डालती। फिर भी तू उसके पीछे पड़ा है। "

विनीत," क्या करूँ यार... उसके अलावा और कोई नहीं जचती। "

दोस्त," पर मुझे नहीं लगता वो मानेगी। डीसेंट सी बंदी है यार, पढ़ने आई है। अब तो कोई है भी नहीं उसका। एक माँ थी, वो भी जा चुकी है। "

विनीत," मैं हूँ न, मैं संभाल लूंगा उसे। एक बार बस वो मेरा प्रपोजल एक्सेप्ट कर ले। "

 दोस्त," चल बेस्ट ऑफ लक, मान जाए तो पार्टी देना मत भूलना। "


उसके बाद वो वहाँ से चला गया। विनीत अपनी क्लास की ओर बढ़ गया। विनीत कोई बुरा लड़का नहीं था। 

जब मीरा पहले साल कॉलेज आई थी तब बाकी के साथ साथ विनीत भी उसे देखता रह गया था। इतनी खूबसूरत लड़की पूरे कॉलेज में नहीं थी। 

कई लड़कों ने मीरा को दोस्ती, प्यार के लिए प्रपोज किया। पर मीरा ने अपनी पढाई के अलावा किसी और चीज को वक्त ही नहीं दिया। 

धीरे धीरे सब बदल गया। लेकिन विनीत नहीं बदला और हमेशा मीरा से अपने दिल की बात कहने की कोशिश करता रहा। 

क्लास में आकर मीरा अपनी पढाई में लग गयी। उसे एक महीने के रिविजन के साथ साथ उसे आने वाले फाइनल ईयर के एग्जाम की भी तैयारी करनी थी। 

कॉलेज खत्म होने के बाद निधि और मीरा घर के लिए निकल गयी। इंदौर आने के बाद पहली बार मीरा इन सडकों पर घूम रही थी। 

उसे तो जैसे ये सब सपने जैसा लग रहा था। भूख लगी तो निधि मीरा को लेकर रेस्ट्रा में चली गयी। भीड़ कम थी। 

निधि ने दोनों के लिए सैन्डविच और जूस ऑर्डर किया। वेटर ऑर्डर लेकर चला गया। मीरा को खोया देखकर निधि ने कहा।

निधि," हे... क्या हुआ, क्या सोच रही हो मीरा ? "

मीरा," विनीत के बारे में सोच रहे हैं। समझ नहीं आता उसे कैसे कहे कि हमें ये सब नहीं पसंद ? "

निधि," वो तुम्हे लाइक करता है मीरा। "

मीरा," पर हमारे मन में उसके लिए कोई फीलिंग्स नहीं है, निधि। हम नहीं चाहते कोई हमारे लिए एक तरफा फीलिंग रखे। हम किसी को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते। "

निधि," तुम उसके बारे में सोचकर तो देखो। हो सकता है तुम्हारे दिल में उसके लिए जगह हो। "

मीरा," नहीं निधि, ऐसा नहीं है। होता तो हम तुझे जरूर बताते। विनीत अच्छा लड़का है। लेकिन हम उसके लिए कुछ महसूस नहीं करते हैं। "

निधि," ओके, तुम परेशान मत हो। ज्यादा सोचोगे तो ज्यादा उलझ जाओगी। अच्छा ये बताओ इस संडे मूवी देखने चलोगी ? "

मीरा," और पढाई..? "

निधि," पढाई पढाई पढाई, इसके अलावा भी एक दुनिया है मीरा। "

मीरा," पर हमने तो वो दुनिया देखी ही नहीं न। "

निधि," तो चल न, मैं दिखाती हूँ। सच्ची बहुत मजा आएगा। तुम, मैं, कृति और ऋतु सभी चल रहे हैं। प्लीज चलो न। "

मीरा," नहीं चल सकती। "

निधि," अच्छा तुमसे एक बात पूछूँ मीरा ? "


मीरा ," हां। "

निधि," तुम हॉस्टल में 2 साल से हो, फिर भी तुमने ये शहर नहीं देखा। मतलब तुम हॉस्टल से बाहर कभी नहीं निकली। ऐसा क्यूँ..? "

मीरा," माँ ने कसम दी थी। "

निधि," कसम... पर क्यूँ और ऐसी कसम कौन देता है ? "

मीरा," हम नहीं जानते, पर उन्होंने यहाँ आने के लिए एक शर्त रखी थी हमारे सामने। हमें पढ़ना था, इसलिए हमने उनकी बात मान ली। आज वो हमारे साथ नहीं है, लेकिन इस तरह जा 
कर उनकी कसम नहीं तोड़ सकते। "

निधि," अब मैं क्या कहूँ ? आंटी ने ऐसा क्यों कहा होगा ? तुमने कभी उनसे पूछने की कोशिश नहीं की ? "

मीरा," इसके अलावा ऐसे बहुत से सवाल हैं निधि जो हम माँ से जानना चाहते थे। लेकिन वो सवाल बस सवाल बन कर रह गए। उनका जवाब हमारे पास नहीं है। "

निधि," कोई बात नहीं, तुम नहीं जाना चाहती तो हम तुम्हे फोर्स नहीं करेंगे। "

मीरा," थैंक्स। "

दोनों बातें कर ही रही थी कि वेटर आर्डर लेकर आ गया। दोनों ने सैन्विच खाये और जूस पिया। 

उसके बाद दोनों घर के लिए निकल गयीं। घर आकर मीरा ने कपड़े बदले और कुछ देर के लिए लेट गयी। निधि के सवाल उसके मन में चलने लगे। 

आखिर क्यों माँ ने उसे शहर घूमने से मना किया ? आखिर क्या रिश्ता होगा उनका इस शहर से ? कुछ सवाल सिर्फ सवाल बन कर रह जाते हैं।

उनके जवाब क्यूँ नहीं होते ? मीरा उठकर बैठ गयी। मुश्किल से वो माँ का ख्याल अपने जहन से निकाल पायी। 

क्यूँकि वो कमजोर नहीं पड़ना चाहती थी। मीरा एक बार फिर लेट गयी। आंख लगी तो सारी बातें, सारे ख्याल अपने आप जहन से बाहर होते गए। शाम को निधि ने कमरे में आकर उसे उठाते हुए कहा।

निधि," कितना सोयेगी? शाम हो चुकी है। मम्मा को तो टेंशन हो रही थी कि तुम बीमार तो नहीं हो गई। चलो नीचे चलकर दर्शन दो उन्हें। "

मीरा," वो ज़रा आँख लग गई थी। "

निधि," कोई बात नहीं, तुम मुह धो लो। मैं तब तक कमरा ठीक कर देती हूँ। "

मीरा," हम आते हैं। "

कहते हुए मीरा उठी और बाथरूम की और बढ़ गई। निधि ने कमरा साफ़ किया और फिर दोनों नीचे आ गयीं। 

मीरा ने सफ़ेद रंग का बंद कॉलर वाला कुर्ता पहना था और नीचे पीले रंग का पटियाला। लेकिन इन कपड़ो में भी वो बहुत प्यारी लग रही थी। जैसे ही नीचे आई, राधा ने कहा। 

राधा," क्या हुआ बेटा, तुम दोपहर का खाना खाने नीचे नहीं आई, तबियत तो ठीक है न ? "

मीरा," वो कॉलेज से आते हुए निधि ने बाहर कुछ खिला दिया था। इसलिए भूख नहीं थी। सोरी, आपको बताया नहीं। "

राधा," कोई बात नहीं। रात के खाने में क्या खाओगी ? "

मीरा," जो भी आप प्यार से खिला दें। "


मीरा ने मुस्करा कर कहा। इधर उधर की बातों के बाद रात में सभी खाने के टेबल पर जमा थे। बस अपने अक्षत बाबू ही फरार थे। विजय ने देखा तो राधा से कहा।

विजय ," अक्षत कहाँ है ? "

निधि," आज तो भाई गया। "

निधि ने अर्जुन से कान में फुसफुसाते हुए कहा।

 
अर्जुन," पापा के गुस्सा होने से पहले ही वो आ जाएगा। "

अर्जुन ने बिना निधि की ओर देखे कहा।

निधि," लगी बैट..? "

अर्जुन," ठीक है, लग गयी 500-500 की। "

राधा से कोई जवाब नहीं पाकर विजय ने एक बार फिर कहा। 
विजय," राधा, मैं कुछ पूछ रहा हूँ। "

राधा," वो... वो आंसू से बात हुई थी। उससे वो बाहर वो मतलब...। "

राधा ने अटकते हुए कहा। 

विजय," आज फिर वो बाहर गया है ? "

राधा," नहीं वो...। "

राधा कहते कहते रुक गयी। 

अक्षत," माँ जल्दी से खाना लगाओ, बहुत भूख लगी है। "

अक्षत ने कुर्सी पर बैठते हुए कहा। अक्षत को वहाँ देखकर सभी हैरान थे सिवाए अर्जुन के। "

विजय," कहाँ थे तुम ? "

अक्षत," माँ ने आपको बताया नहीं, ऊपर था, सो रहा था। "

अक्षत ने बिना विजय की और देखे कहा।

राधा ," हाँ, यही तो कह रही थी, सो रहा था ऊपर। खाना शुरू कीजिये, ठंडा हो रहा है। "

कहते हुए राधा भी बैठ गयी। सभी खाने लगे। लेकिन मीरा को शक हो रहा था। अक्षत ने जल्दी से खाना खाया और उठने लगा तो दादी ने बैठाते हुए कहा। 

दादी," ये क्या सिर्फ एक रोटी..? देख कितना दुबला हो गया ? चल बैठ और ये दो परांठे और खा। "

अक्षत ने जैसे ही ना करने के लिए मुंह खोला, विजय ने कहा 

विजय," खाओ चुपचाप। "

मरता क्या ना करता, खाने लगा। मीरा को कुछ तो गड़बड़ लगा। अक्षत खाने में इतने नखरे क्यों कर रहा था, आखिर क्या वजह थी यह तो आगे ही पता चलेगा। 

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हेलो दोस्तों ! मैं हूं आपका अपना दोस्त, प्रदीप। यहां मैं कुछ अनोखी कहानियों के साथ आपका मनोरंजन करूंगा। अगर आपको हमारा लेखन कार्य पसंद आए तो हमें Support करें और अपना प्यार बनाए रखें।

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